चितकारा और लवली यूनिवर्सिटी की घटनाओं की हो निष्पक्ष जाँच, दोषियों को मिले सख्त सज़ा : हरविंदर सोनी

 

 

 

आज शिवसेना बाला साहेब ठाकरे की विशेष बैठक दीपक भगत की अध्यक्षता में सम्पन्न हुई जिसमें राज्य वरिष्ठ उपप्रमुख हरविंदर सोनी, जतिन्दर सहदेव,राजू ठाकुर, जगजीवन, अमित, दिनेश आदि विशेष रूप से उपस्थित हुए,
इस मौके पर सभी नेताओं ने संयुक्त रूप से पिछले दिनों चितकारा यूनिवर्सिटी तथा लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी (LPU) में सामने आई घटनाओं एवं हंगामे को गंभीर चिंता का विषय बताते हुए सरकार, प्रशासन तथा संबंधित विश्वविद्यालय प्रबंधनों से इन मामलों की निष्पक्ष, स्वतंत्र, पारदर्शी और समयबद्ध जाँच करवाने की मांग की है।

उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों में देश के विभिन्न राज्यों और अलग-अलग पृष्ठभूमियों से विद्यार्थी शिक्षा प्राप्त करने आते हैं। ऐसे संस्थानों में अनुशासन, सुरक्षा और कानून का सम्मान सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। यदि किसी विवाद के दौरान कानून-व्यवस्था प्रभावित होती है, हिंसा या तोड़फोड़ जैसी स्थिति पैदा होती है अथवा विद्यार्थियों में भय का वातावरण बनता है, तो पूरे मामले की गंभीरता से जाँच होना आवश्यक है।

उन्होंने कहा कि किसी भी विद्यार्थी को भीड़ की ताकत के आधार पर कानून अपने हाथ में लेने की अनुमति नहीं दी जा सकती। विवाद किसी भी पक्ष से शुरू हुआ हो, कानून सभी के लिए समान होना चाहिए।

हरविंदर सोनी ने मांग की कि जाँच एजेंसी यह स्पष्ट करे कि घटनाओं की वास्तविक शुरुआत कैसे हुई, किन लोगों की क्या भूमिका थी, क्या किसी ने चुनाव नज़दीक होने के कारण जानबूझकर माहौल खराब करने का प्रयास किया, क्या विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से समय रहते उचित कदम उठाए गए और क्या किसी स्तर पर प्रशासनिक लापरवाही हुई।

उन्होंने कहा कि जाँच केवल कुछ विद्यार्थियों को चिन्हित करके समाप्त नहीं होनी चाहिए, बल्कि घटना की पूरी कड़ी और प्रत्येक संबंधित व्यक्ति की भूमिका सामने लाई जानी चाहिए। यदि किसी विद्यार्थी, बाहरी व्यक्ति, संगठन या अन्य संबंधित व्यक्ति की भूमिका कानून तोड़ने में पाई जाती है तो उसके विरुद्ध कानून के अनुसार कठोर कार्रवाई होनी चाहिए।

उन्होंने यह भी कहा कि किसी निर्दोष विद्यार्थी को केवल भीड़, अफवाह या सोशल मीडिया पर चल रही जानकारी के आधार पर दोषी नहीं ठहराया जाना चाहिए। दोषी और निर्दोष के बीच अंतर करने के लिए निष्पक्ष जाँच आवश्यक है।

हरविंदर सोनी ने कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन भी अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकता। यदि जाँच में सुरक्षा व्यवस्था में गंभीर चूक, समय पर कार्रवाई न करने या किसी प्रकार की प्रशासनिक लापरवाही सामने आती है तो संबंधित जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही भी तय की जानी चाहिए।

उन्होंने सरकार से मांग की कि दोनों घटनाओं को केवल विश्वविद्यालय का आंतरिक मामला मानकर दबाने के बजाय, तथ्यों को सामने लाया जाए और जनता को बताया जाए कि जाँच में क्या सामने आया।

नेताओं ने कहा कि कानून का डर तभी कायम रहेगा जब कानून तोड़ने वालों के खिलाफ निष्पक्ष और प्रभावी कार्रवाई दिखाई देगी। यदि दोष सिद्ध होने के बावजूद किसी को राजनीतिक, प्रशासनिक, आर्थिक या किसी अन्य प्रभाव के कारण राहत मिलती है, तो इससे विद्यार्थियों और समाज में गलत संदेश जाएगा।

हरविंदर सोनी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि उनका उद्देश्य किसी विश्वविद्यालय, विद्यार्थी या किसी विशेष समुदाय को निशाना बनाना नहीं है। उनकी मांग केवल इतनी है कि कानून का राज कायम रहे, विद्यार्थियों की सुरक्षा सुनिश्चित हो और दोषी व्यक्ति की पहचान होने पर उसके खिलाफ बिना किसी भेदभाव के कानूनी कार्रवाई हो।

सोनी ने कहा कि विश्वविद्यालय ज्ञान और चरित्र निर्माण के केंद्र हैं। इन्हें हिंसा, अराजकता और दबाव की राजनीति का मैदान नहीं बनने दिया जा सकता। चितकारा और लवली यूनिवर्सिटी की घटनाओं की सच्चाई सामने आनी चाहिए। दोषी कोई भी हो, कितना भी प्रभावशाली हो, यदि जाँच में उसका अपराध सिद्ध होता है तो उसे कानून के अनुसार ऐसी सज़ा मिलनी चाहिए कि भविष्य में कोई भी व्यक्ति कानून हाथ में लेने से पहले सौ बार सोचे।”

हरविंदर सोनी ने अंत में सरकार और प्रशासन से अपील की कि दोनों घटनाओं की निष्पक्ष जाँच शीघ्र पूरी कर दोषियों पर कानूनी कार्रवाई की जाए तथा विश्वविद्यालय परिसरों में विद्यार्थियों की सुरक्षा और अनुशासन सुनिश्चित करने के लिए ठोस व्यवस्था की जाए।

— हरविंदर सोनी
शिवसेना